आजकल के मगही गानों को सुनकर मुझे एक बात महसूस होती है, कि उनमें originality (मौलिकता) कम होती जा रही है। ऐसा लगता है जैसे हर गाना एक ही पैटर्न पर बन रहा है, और धुनें भी एक जैसी ही हैं।

कुछ कलाकारों पर ही पूरा फोकस रहता है, जो अच्छा है, लेकिन क्या इससे नए टैलेंट को मौका नहीं मिल रहा? और क्या ये मगही संगीत की विविधता को कहीं न कहीं कम कर रहा है? मैं मानता हूं कि कुछ गाने बहुत हिट होते हैं, लेकिन क्या हम सिर्फ हिट गानों के पीछे भाग रहे हैं और संगीत की कलात्मकता को भूलते जा रहे हैं?

मुझे लगता है कि मगही संगीत में और ज्यादा एक्सपेरिमेंटेशन और नए विचारों की जरूरत है ताकि यह सिर्फ भोजपुरिया गानों की कॉपी न लगे। आप लोगों की इस बारे में क्या राय है?