दोस्तों, क्या आप लोगों ने नोटिस किया है कि आजकल के मगही गीतों में पारंपरिक वाद्ययंत्रों की जगह अब सिर्फ लाउड 'इलेक्ट्रॉनिक बीट्स' ने ले ली है? क्या आपको लगता है कि इससे हमारे लोक संगीत की मिठास और उसकी जो पारंपरिक आत्मा है, वो कहीं खो रही है? क्या हमें फिर से उन पुराने 'देहाती' स्टाइल के होली गानों की तरफ लौटना चाहिए, या आज के युवाओं के लिए ये 'डीजे धमाका' वाला बदलाव ही सही है? आपकी इस पर क्या राय है?